रात के ३ बजे
वैसे दोस्तों मैं आपकी दोस्त दिशा दर्शन शाह पटवा हुं। वैसे आपने मेरी बहुत सारी कहानियां पढ़ी होगी जैसे की रोमेंटिक, धोखेबाजी वाली और तो और सामाजिक और पारंपरिक मुद्दे वाली भी लिखी जिसे आप सब ने बहुत सराहना दी है। मैंने हर मुद्दे पर लिखा है। विश्वास अंधविश्वास पर भी मैंने लिखा है लेकिन सच कहूं तो मैं कभी भी भुत प्रेत पिसाच पर विश्वास नहीं करती क्योंकि मेरा मानना यह हैं की इस दुनिया में भुत पिसाच नहीं होते लेकिन हां आत्माएं जरुर होती है और तो और नकारात्मक ऊर्जा भी होती है जो हमें उनकी तरफ अट्रैक्ट करती है।
मैंने ये सब तब माना जब मेरे साथ वो हादसा हुआ था। पहले मैं इन सब को वहेम ही मानती थी लेकिन जो कुछ भी मेरे साथ उस समय हुआ था उस समय के बारे मे सोचकर तो मेरा सारा point of view ही बदल गया। सच कहूं तो मैं चाहकर भी उस रात के हादसे को भुला नहीं पा रही हुं। इतने साल बित गए पर मुझे वो नज़ारे याद आते हैं तब मेरी रुह कांप जाती हैं।
मेरी मां की डेथ के बाद मैं बहुत उदास हो चुकी थी और तो और मेरा कुछ भी करने को मन नहीं कर रहा था। एसा कहना ग़लत नहीं होगा की मैं depression का शिकार होने लगी थी क्योंकि मैं अपनी मां से बहुत प्यार करतीं थीं और उसे जिंदा रखने के लिए मैंने हर कोशिश संभव की पर उसने आखरी समय मे गुस्से में यह कहा की आज जो भी उसकी हालत है उसकी जिम्मेदार मैं हुं और इतना कहकर वह मर गई। वह मर तो गई पर मेरे सिर पर वह guilt छोड़कर गई।
समय बितता गया और साथ में घर की जिम्मेदारी यो में मैंने रोना भुल सी गई पर दुख कम नहीं हुआ उल्टा और भी ज्यादा बढ़ता चला गया और दिल के एक कोने में भरता चला गया। मैंने दुख को कम करने के लिए लिखना चालु किया और धीरे धीरे लिखने की वजह से मेरा depression भी कम होता चला गया। Writing की वजह से मैं खुश होने लगी थी क्योंकि लोगों को मेरी कहानियां हद से ज़्यादा पसंद आने लगी थी पर एक रात कुछ एसा हुआ जिसकी वजह से मेरी लाइफ पुरी बदल गई।
रात के approx 3 बजे मैं बेडरूम मे अपनी कहानी लिखकर खड़ी हुई थी। वैसे लेट होने की वजह से मैं फटाफट फ्रेश होकर लाइट ओफ करके सोने को हुई ही थी तब अचानक पता नहीं कैसे मेरे बेडरूम की sliding जोर जोर से हिलने लगी और अचानक शांत हो गई। पहले मुझे लगा की थकावट की वजह से मुझे वहम हुआ होगा इसलिए मैंने उसे ignore करके वापस मैं सोई हुई ही थी पर पता नहीं कैसे वापस से वह चीज़ हुई। ये देखकर मुझे हद से ज़्यादा डर गई और तुरंत ही अपने बिस्तर पर खड़ी होकर बैठकर सामने sliding को देखा।
सामने का नज़ारा देखकर तो मैं हद से ज़्यादा shocked और डर दोनों गई। एक्चुअली मेरे रुम की sliding बिना किसी के हिलाए जोर जोर से हिल रही थी। ये देखकर मैंने तुरंत लाइट चालू की और हिम्मत करके sliding खोली तो बाहर टेरेस में कोई नहीं था। ये देखकर मुझे लगा की शायद ये मेरा वहम ही है इसलिए मैं वापस से बिस्तर पर सो गई।
जैसे ही मेरी आंख लगने ही वाली थी तब ही अचानक वापस से आवाज चालु हो गई और धीरे धीरे वह आवाज और भी ज्यादा तेज हो गई। मैं ये देखकर बिल्कुल भी नहीं रुकीं और भागकर पापा के पास चली गई। पापा होल में सो रहे थे। जब मैंने पापा को उठाने की कोशिश की तब वापस से वह आवाज तेज होने लगी।
एक्चुअली मेरे पापा को सुनाई नहीं देता इसलिए उनको वो आवाज़ नहीं सुनाई दी। जब मैंने ये नोटीस किया तब पापा को बोला की आप फटाफट कान का मशीन पहनो और आवाज़ सुनने की कोशिश करो। ये सुनकर पापा खड़े होकर कान का मशीन पहने लगे। ये सारी procedure में आवाज़ और भी ज्यादा तेज हो गई पर मैं नहीं डरी और पापा का हाथ पकड़कर रखा।
पर जब पापा ने मशीन पहना और आवाज सुनने की कोशिश की तब पता नहीं कैसे आवाज आना बंद हो गई। मैं ये देखकर तो पुरी तरह शोक्ट हो गई। जब मेरे पापा ने कोई भी आवाज़ नहीं सुनी तो उन्होंने ने मुझे ये बोला की लिखने की stress की वजह से ये सब हो रहा होगा तो इसलिए कुछ दिन तु कुछ भी नहीं लिख बस आराम कर।
जब मैंने ये चीज अपनी बहन जिसकी शादी हो गई थी उसको बताई तो उसने भी मुझे same चीज़ बोली। मेरी बातों पर किसी ने भरोसा नहीं किया। इन्फेक्ट मेरी बहन ने मुझे अपने घर पर stay के लिए बुलाया। उसने कहां तु कुछ दिन मेरे घर पर रहेगी तो तेरा मन शांत हो जाएगा पर मैं उसके घर नहीं जा सकतीं थीं क्योंकि मुझे एक कहानी पुरी करनी और मैं अपने घर को छोड़कर कहीं और नहीं लिख नहीं पाती थी इसलिए मैंने उसे मना कर दिया।
वैसे वह घर पर आना चाहती थी पर उसके घर पर मेहमान आ गए थे उसकी वजह से वह नहीं आ पाई। दुसरा दिन तो अच्छे से बित गया पर जैसे जैसे रात का समय आ रहा था मेरे मन मे जो डर था वह और भी ज्यादा बढ़ने लगा था। समय के साथ १० बजे ११ बजे। आज मुझे लिखने का मन भी नहीं हो रहा था पर तो भी मैं लिखने की कोशिश कर रही थी।
समय बितता गया और उस रात कुछ नहीं हुआ। ये देखकर मैं खुश हो गई और खुश होकर मैं वोशरुम में बैठी ही थी तब ही वोशरुम की लाइट on off होने लगी। मुझे समझ नहीं आ रहा था की ये वापस से नया क्या चालु होने लगा। एक दो बार ये होने बाद वापस से सारी चीजें नोर्मल हो गई।
मुझे अब कुछ भी समझ नहीं आ रहा था की ये सब क्यों मेरे साथ हो रहा है। समय बितता गया और कुछ ना कुछ होता चला गया। मैं जब भी किसी को ये हादसे के बारे मे बताती थी की मेरे साथ क्या क्या हो रहा है ये सुनकर बस सब लोग यहीं कहते थे की तु अपनी मां को बहुत याद करती है इसलिए तुझे ये सारे वहेम हो रहे हैं।
तुने अपना दर्द किसी के सामने जाहिर नहीं किया इसलिए वह दर्द तुझपर हावी हो रहा है। वैसे ये सच नहीं था पर कोई मानने को तैयार ही नहीं था। समय के साथ मेरी तबियत भी बिगड़ने लगी पर कोई विश्वास करने को तैयार ही नहीं था इसलिए मैंने ये बात अपने अंदर रखने को सोचा पर मन ही मन मे इसका इलाज ढुंढने के बारे मे सोचा और बिना समय गंवाए मैं एक बड़े ज्योतिषीय के पास चली गई।
जो जो कुछ भी मेरे साथ हो रहा था वह सब बता दिया और सारी बातें सुनकर उस ज्योतिष ने बस मुझे इतना बोला की तु इन सब चक्कर में मत पड़ और अपने करियर पर फोकस कर और जितना हो सके उतना जल्दी शादी करले क्योंकि जब तक तेरी शादी नहीं होगी तब तक तेरे साथ ये सब होता रहेगा।
इसलिए जितना हो सके उतना जल्दी शादी कर और जब तक तेरी शादी नहीं होती तब तक तु रोज दो टाइम हनुमान चालीसा पढ़ और इन सब से दुर रह बस…..
(ये सुनकर बस मैंने वहीं चालु किया और समय के साथ हालात सुधारने लगे। वैसे घर मे मेरे साथ कोई ना कोई एक्टिविटी होती रहती थी पर उसकी वजह से मुझे कोई हानी नहीं पहुंचती थी। देखते ही देखते मेरी शादी पक्की हो गई और मैंने जब ये बात ज्योतिष मतलब गुरु जी को बताई तब उन्होंने बस इतना ही बोला की अब तुझे कोई सताएगा नहीं।
जब मैंने ये सुना तब मेरे मन मे सवाल उमड़ने लगे और मुझसे रहा नहीं गया और मैंने पुछ लिया की जो कुछ भी मेरे साथ हो रहा था वह क्या वहम था मेरा?? तब उन्होंने बस मुस्कुराते हुए इतना ही बोले की तुझे कोई नकारात्मक ऊर्जा या फिर कोई आत्मा अपनी तरफ़ खिंच रही थी।
वैसे भी तेरा घर सम्शान के पास हैं और तु रात को उस जगह से वोक करके आती थी। उपर से तेरा घर पिपल के पेड़ के सामने है इसलिए सारी शक्तियां तेरे घर पर आना चाहती थी। ये सब रात के तीन बजे होने मतलब ही यही है इसलिए तेरे साथ ये सब हो रहा था।
वैसे भी तु अपनी मां के जाने के बाद उदास हो गई थी जिसकी वजह से तु मेंटली विक हो गई क्योंकि तु guilt में फंस गई थी इसलिए ये सारी शक्तियां तुझ पर हावी होने की कोशिश कर रही थी बस और कुछ नहीं। वैसे ये सारी शक्तियां कमजोर इंसान को ढुंढती है जो तु थी पर अब कुछ नहीं हैं।
बस अब इतना ध्यान रखना की कभी भी उस रास्ते पर मत जाना। ये सुनकर मैं पुरी तरह हिल गई थी पर अब सब ठीक है। मेरी शादी हो गई है और आज मेरा बच्चा भी है पर उस हादसे के बारे में सोचती हुं तो मैं डर जाती हुं।
लेकिन एक बात हैं — आज भी जब भी मैं अपने घर जाती हुं तो मुझे अपने घर में रात को निंद नहीं आती। लोग कहते।

लेखक परिचय — दिशा दर्शन शाह पटवा
दिशा दर्शन शाह पटवा एक कुशल और संवेदनशील लेखिका हैं, जिन्हें कहानी कहने का गहरा जुनून और भावनात्मक विवरणों को पकड़ने की अद्भुत दृष्टि प्राप्त है। उनकी लेखन यात्रा में प्रेम, रिश्तों, और जीवन के विविध पहलुओं पर आधारित कहानियां, कविताएं और कल्पनात्मक रचनाएं विशेष स्थान रखती हैं।
अपने लेखन सफर में दिशा के सबसे मजबूत स्तंभ उनके माता‑पिता (विशेषकर उनके पिता अर्जेश पटवा), उनके ससुरालवाले, और उनके पति दर्शन शाह रहे हैं — जिनके सहयोग और प्रेरणा से उन्होंने अपनी रचनात्मक पहचान को और भी सशक्त बनाया है।
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